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“आप जपहु अवरा नाम जपावहु…”, कृपया इसका अर्थ बताएं?

Q : सुखमनी साहिब में वचन आता है :- ' आप जपहु अवरा नाम जपावहु, सुनत कहत रहत गति पावहु '. इसका क्या अर्थ है. कृपया अर्थ समझाएं. फिर कहा , ' अवर उपदेसै आपि न करै, आवत जावत जनमै मरै '. कृपया दोनों वचनों का अर्थ समझाएं.

मालविका



Answer

"आप जपे अवरा नाम जपावे", इसका अर्थ है - भक्त या संत कौन होता है, वह होता है जो स्वयं भी जप करता है और दूसरों को जप, सुमिरन करने में उत्साहित करता है| "सुनत कहत रहत गत पावे" जब कोई आदमी ज्ञान सुनता है तो उसको सुनते हुए और फिर उसका मनन करे, तो उसको कहते  हैं, 'कहत', 'रहत'| उस सुने हुए उपदेश के अनुसार जीते हुए ' गत पाए' ,उसकी सतगति होती है, उद्धार होता है| तीसरी पंक्ति आपने पूछी, "अवर दसे आप ना करे आवत जावत जन्म मरे"|मतलब हुआ वह आदमी जो दूसरों को उपदेश तो करता है, पर उपदेश अनुसार खुद नहीं जीता, उसका जन्म मरण छूटता नहीं है, वो भटकता ही रहता है|

गुरुमाँ

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