‘ओम नम: शिवाय:’ के ध्यान में अलग-अलग आवाज़ें सुनाई देती हैं?
Q : जब भी में 'ओम नम: शिवाय:' के ध्यान में बैठता हूँ, बीच में अलग अल्ग प्रकार की आवाज़ें सुनाई देती है... जैसे पायल की या कोई इंसान मेरे साथ 'ओम नम: शिवाय:' बोलता हो, उस समेय मेरा मन विचलित हो जाता है!
Narendra Makwana
Answer 'ओम नम: शिवाय:' जब तुम करते हो तो जो सुर या आवाज़े तुम्हें सुनाई पड़ती हैं, यह कही ओर से नहीं आ रही हैं, यह तुम्हारे अपने ही मन से आ रही हैं, और, जैसा तुम यह महसूस करते हो, की कोई इंसान भी साथ में बोल रहा है, तो नरेंद्र, तुम्हारा मन एक कहाँ, तुम्हारा मन तो हज़ारों अस्तित्वों के साथ हैं| माने तुम्हारा मन एक नहीं है| अनेक मन होते हैं, और, ये अनेक मन अपने अपने तल पर अपनी अपनी सोच और अपने अपने विचार चलाते हैं|
जैसे आप शिव मंत्र भी जप सकते हैं, और साथ ही आपका मन बिज़नेस, बाज़ार, दुकान, रिश्तेदार, उनके बारे में भी बराबर सोच रहा होता है| तो एक ही समेय में मन बहुत सी चीज़ों को सोच सकता है| मन अपने आपको बहुत रूपों में विभक्त कर सकता है| सो ऐसा ही संभव है की कुछ ऐसा ही आपके जप के समेय में हुआ हो|
Gurumaa