Q : मैं अपने अंदर की बहुत सी बुराइयों को जानती हूँ मुझे पता है मेरे अंदर क्या क्या कमियाँ हैं| मैं उन बुराइयों को खत्म करना चाहती हूँ कई बार कोशिश भी की पर सफलता नही मिल रही| मैं क्या करूँ मुझे क्या करना चाहिए? मैं अपने आप को बदलना चाहती हूँ और ये कैसे होगा? नेहा
Answer नेहा, आपकी सोच बहुत अच्छी है| आप अभी अपनी बुराइयों को ख़त्म करने की कोशिश मत कीजिए अभी सिर्फ़ आप ये देखिए की बुराइयाँ कितनी हैं, और दूसरा ये कारण ढूंढीए कि वो बुराइयाँ क्यों हैं जिस दिन आपको इन बुराइयों के कारण समझ आ गये, जिस दिन आपको इस बात का एहसास अच्छे से हो गया कि इन बुराइयों की वजह से आपका ही नुकसान हो रहा है, आप ईश्वर से दूर हैं, आप साधना से दूर हैं शायद उसी दिन आपके अंदर एक ललक जागेगी| सो अभी अच्छा होने की कोशिश मत करिए झूठा अच्छा होने से अच्छा है एक सच्चा झूठा रहिए| झूठ है, बुराइयाँ हैं, लोभ है, काम वासना है, अहंकार है, इर्ष्या है, द्वेष है, जो भी कुछ है, है ना, स्वीकार करो, पर साथ में ढूंढो उसके कारण कि ऐसा तुममे क्यों है किस वजह से है और लिखो उसको अथवा मंथन करो इन सब चीज़ों का| शायद इसमे तुम्हें कारण समझ आ जाए कि जिन कारणों से आपके मन में ये दुर्भाव जगते हैं वह कारण का निवारण भी हो सकता है पर तुम कारण ढूंढो, निवारण का तरीका हम बता देंगे पर पहले ढूंढो तो सही|