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At BBC Asia Network, U.K. (2010)
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Interview by Marie Charpentier
The chosen shakti girls meet gurumaa
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क्या आप तनाव में हैं?
योग निद्रा
योग निद्रा - स्वस्थ जीवन का मंत्र
काम से लड़ो मत
काम - एक शक्ति
शिव सूत्र
योग निद्रा - स्वस्थ जीवन का मंत्र

निश्चिंत जीने के लिए एक तरीका यह है कि यह ज्ञान जो आप सुन रहे हैं, इसको अपने जीवन में ले आएँ । सत्संग करो, बैठो संतों के पास, सीखो उनसे ज्ञान, अपनाओ उस ज्ञान को, सीखो उनसे सुमिरन करने का तरीका, सुमिरन करो, ज़िंदगी मिली ही इसीलिए है।
गुरु अर्जुनदेव का जो गीत है ‘गोबिंद के गुन गाओ साधो’ यह जीवन मिला ही इसीलिए है। लेकिन चिंताग्रस्त मन सुमिरन भी कैसे करे? तो ऐसे ही मन के लिए जो अभी शांत नहीं है, हमने एक प्री-मेडिटेशन तरीका शुरु किया है। ध्यान से भी पूर्व अगर आप करते हैं तो यह आपको ध्यान अथवा सुमिरन करने की ओर ले जाएगा। उसी तरीके का नाम है - योग निद्रा। वैसे तो योग तब करते हैं, जब नींद से जगते हैं। पर कौन सा योग है जो नींद में ही होगा? या तो आप जागते हैं, या गहरी नींद में सो जाते हैं। लेकिन योग निद्रा की पद्धति में आप पूरी होश में भी हैं और गहरी नींद के जैसे तमाम लक्षण आपके शरीर और मन में मौजूद होते हैं।
योग निद्रा के द्वारा आप अपने शरीर को विश्राम देते हैं। आप कहोगे कि ‘ हम तो रात को सो जाते हैं’, माफ़ कीजिए सोकर भी सुबह उठकर अगर बोझिल महसूस करते हो तो उसका कारण यह है कि आपकी नींद में स्वप्न चलते रहते हैं। आपने कभी गिना है कि एक रात में आप कितनी करवटें लेते हैं? इधर, उधर, कभी गर्मी लग रही, कभी मच्छर काट रहे हैं, कभी प्यास लगी, कभी बाथरूम जाना है और कभी थकान से ऐसे ही शरीर इतना अकड़ जाता है कि नींद नहीं आती। नींद आ भी गयी तो कच्ची नींद, आई तो स्वप्न चलते रहे और इतने में अलार्म बज गया और उठना पड़ा। बच्चों को स्कूल जाना है, पति को ऑफ़िस जाना है, वग़ैरह वग़ैरह। सात घंटे की नींद के बाद भी अगर आप थकान महसूस करते हैं, बोझिल महसूस करते हैं, मन चिड़चिड़ा रहता है तो आपके शरीर के तनाव में होने के लक्षण हैं ।
अगर मैं पूछूँ कि आप में से कितने लोगों को स्पॉंडिलाइटिस है, तो बहुत लोग होंगे। बहुत से लोगों को साइनस की समस्या, सांस ठीक से नहीं ले पाते, जुकाम बना रहता है, सिर दुखता रहता है। औरतें तो जब देखो सिर पकड़े रहेंगी। सिर दुखना भी चिन्ह है, आपके तनाव में होने का।
बुरा ना मानें, अक्सरकर घरों के जो माहोल बिगड़ जाते हैं, वह इसीलिए बिगड़ जाते हैं कि तुम्हें अपने रिश्ते निभाने नहीं आते। इसीलिए नहीं निभा पाते हो क्योंकि आपको हमेशा यह उम्मीद रहती है कि दूसरा आपके लिए कुछ करे। और आप दूसरे में हमेशा कमी ही ढूँढते रहते हो। जो मन तनाव में होगा तो शरीर भी अस्वस्थ हो जाएगा।
आप में से कितने लोगों को अपच है? आप में से कितनों को खट्टी डकारें आती हैं? इसका भी कारण आपके मन का तनाव है। मन का ही तनाव शरीर में आता है और वह रोग बन जाता है। 80 प्रतिशत रोग मन से शरीर को आते हैं, शरीर से मन को नहीं जाते। तो अगर हम अपने मन को स्वस्थ रख सकें तो शरीर भी स्वस्थ रहेगा।
योग निद्रा आपको इसी सुंदर स्वास्थ्य की ओर लेकर जाती है और बहुमुखी विश्राम देती है। योग निद्रा शरीर के तल पर मांसपेशियों को, नाड़ीयों को तो विश्राम देती ही है, साथ में हमें मानसिक, भावनात्मक और वैचारिक विश्राम की ओर भी ले जाती है।
मज़े की बात यह है कि योग निद्रा बैठ कर नहीं करनी, लेट कर करनी है। एक ने कहा कि ‘मज़ा आ गया, सो जाएँगे’, अरे भाई! सोना नहीं है, जगना है। तो योगनिद्रा बहुत ही खूबसूरत, शक्तिशाली प्रयोग है, जिसके द्वारा आप अपने शारीरिक और मानसिक तनावों से मुक्ति पा सकते हैं। और तनावमुक्त हुआ मन ही सुमिरन कर सकता है। अब जैसे किसी के कंधे अकडे हुए हैं, या गर्दन में दर्द हो रही है ऐसा इंसान कभी सीधा बैठ ही नहीं सकता। जिसके घुटने दुख रहे हैं, वह चौकड़ी कैसे मारेगा, आसन में नहीं बैठ सकेगा। अगर स्थिर आसन नहीं होगा तो ध्यान कैसे लगेगा?
ध्यान की पहली शर्त है कि आपका आसन, शरीर स्थिर होना चाहिए। लोग रॉकिंग चेयर की तरह हिलते रहते हैं। क्यों? क्योंकि मन हिल रहा है। कारण? शरीर अस्वस्थ है। इसलिए मेरे मतानुसार जिन छात्र-छात्राओं को, जिनमें एकाग्रता की कमी रहती है, अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, जो पढ़ते हैं वह याद नहीं रहता है, उनके लिए योग निद्रा अमूल्य धन है ।
आज के समय में आर्थिक संकट छाया हुआ है। पूरी दुनिया में महँगाई बढ़ रही है । जो कभी बहुत ज़्यादा कमा रहे थे उनकी कमाई भी कम होती जा रही है। बहुत से लोगों की नौकरियाँ छूट रही हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियों में छटाई हो रही है। खाद्य की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।
ऐसे कठिन समय में कमाई तो बढ़ नहीं रही, उल्टे महँगाई की जो मार पड़ रही है इसके कारण भी तनाव बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे मुश्किल समय में अगर आप शांत चित्त होकर नहीं जी पाएँ तो निश्चित है कि आप अपने लिए कुछ ख़तरनाक कदम उठा सकते हैं। यह जो आए दिन आत्म-हत्या की घटनाएँ घट रही हैं, महँगाई के कारण पूरा का पूरा परिवार आत्महत्या कर लेता है। आदमी तंग आकर खुद अपने बच्चों को, पत्नी को और फिर स्वयं को गोली मार रहा है, रोज़ की कहानी होती जा रही है ।
जीवन और तनाव आज पर्यायवाची हो गये हैं। मेरा निवेदन है कि आप सुमिरन करो, ध्यान तो तनाव में हो नहीं सकता। इसलिए कृपया योगनिद्रा अवश्य करें। 40 मिनट के इस प्रयोग को करने में आपको कष्ट भी नहीं होगा, क्योंकि योग निद्रा लेट कर करना है। जिनको रात में नींद ठीक से नहीं आती, जिनका ब्लड प्रेशर उपर-नीचे होता रहता है, उन सब के लिए योग निद्रा रामबाण का काम करती है । कारण यह है कि जब आपका मन समस्त तनावों से मुक्त हो जाता है, तब आपका शरीर भी ठीक से चलता है। और गहरी नींद हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ज़रूरी है । क्योंकि नींद में ही हमारे एनडोक्राईनल सिस्टम से आवश्यक रसायनों का स्राव होता है।
जब आप ठीक से सो नहीं पाते, तो आप की ग्रंथियों से स्राव ठीक से नहीं होता। जब स्राव ठीक नहीं होता, तभी रोग उत्पन्न होते हैं। हमारा अंतरंग सिस्टम ठीक से काम कर सके, उसके लिए आवश्यक रसायन हमारा शरीर ही बना लेता है। जब हम ठीक से सो नहीं पाते, तब इन ग्रंथियों का स्राव ठीक से हों नहीं पाता और जब स्राव ठीक से नहीं हो पाता तभी रोग उत्पन्न होते हैं।
जैसे आपको अपचन हुआ और आपने गोली खा ली तो थोड़ी देर के लिए पेट ठीक हो गया, लेकिन जब तक दिमाग़ ठीक नहीं करोगे तो बार-बार गोली खानी पड़ेगी। बार-बार सिर क्यों दुख रहा है? क्योंकि तनाव है। हृदयगति बढ़ जाती है। ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होता रहता है। इसका कारण है – तनाव। लोग पूजा पाठ करते हैं, हनुमान चालीसा भी पढ़ते हैं, पर पता नहीं किस हिसाब से करते हैं। पूरी श्रद्धा से शायद नहीं करते, अविश्वास से करते हैं, या करके भी आपको अपने देवताओं पर निश्चय नहीं है, तभी तो घबराहट होती है। आपको घबराहट क्यों हों? हो ही नहीं सकती, होनी भी नहीं चाहिए। पर तुम दोनों काम करते हो। तुम धार्मिक कर्म भी करते हो और चिंता भी करते हो। चिंतामुक्त नहीं हो पाते।
स्वयं को चिंताओं से मुक्त करने के लिए एक बड़ा अचूक साधन है योगनिद्रा। अगर आपको अपने जीवन से, स्वास्थ्य से और मन के शांत रहने से प्रेम हो तो उम्मीद न रखें, कुछ करें ।
एक सज्जन मुझे मिले तो कहते हैं कि आशीर्वाद दीजिए कि सब सुखी रहें। मैने कहा कि अगर मेरे आशीर्वाद में यह बल होता कि मेरे आशीर्वाद देने से सब सुखी रहें, तो मैं गन्नौर आश्रम से बैठे-बैठे पूरी दुनिया को आशीर्वाद दूं और सबका सुख बना रहे। ऐसा करने से सुख नहीं होता बल्कि सुख बनाना पड़ेगा। सुख कैसे बनाएँगे, इसके लिए विवेक, विचार, ज्ञान और मन का शांत होना आवश्यक है। अपनी ज़िंदगी को एक अनुशासन, एक नियम के साथ जीये, संयम के साथ जीये और अगर आप इन सब नियमों का उपयोग करते हैं तो यह आपके लिए लाभकारी है ।
आज सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। रेड लाइट होने पर लोग खड़े हैं, गाड़ियाँ रुकी हुई हैं, जैसे ही पीली बत्ती हुई नहीं कि हॉर्न पर हॉर्न बजने शुरु हो जाते हैं। इतने घबराए हुए, तनाव में ग्रस्त लोग दिखते हैं।
यहीं जालंधर के पुलिस अफ़सर मुझे मिलने आए तो वह कहने लगे कि उनका एक दोस्त एक मार्केट में गया, गाड़ी पार्क की, अंदर गया, शॉपिंग की, जब लौटा तो उसके पीछे ही आकर किसी ने गाड़ी खड़ी कर दी और वह आदमी गाड़ी में बैठा भी हुआ है। उसके दोस्त ने उससे कहा कि ज़रा अपनी गाड़ी पीछे कर लीजिए तो तपाक से बोले कि नहीं करूँगा। उसने कहा कि उसे अपनी गाड़ी निकालनी है, तो कहने लगा कि नहीं करूँगा। वह कह रहा था कि अब ऐसे आदमी से या तो लड़ू या उसका सिर फोड़ दूं। वह कहने लगे कि उस समय इतना गुस्सा आया कि क्या हालत हो गयी है हमारे देश की।
मैने कहा कि उस पर गुस्सा करने की बजाए इसका एक हल यह भी हो सकता था कि उससे कहते कि चल फिर दोनों बैठते हैं, या तो तू मुझे चाय पिला दे या मैं पिला देता हूँ। तू अपना हाल सुना, मेरा सुन । मैं तुझे अपना बताता हूँ, तू मुझे अपना हाल बता। लेकिन तुम उल्टे लड़ने को तैयार बैठे हो। मरने-मारने को तैयार रहते हो। जीना तो तुम चाहते ही नहीं। अगर जीना चाहते तो, बात-बात पर बिगड़ते नहीं, गुस्सा नहीं करते। पर तुम्हारा तो शायद अजेंडा ही यही है कि चिंता कर-करके जल्दी मरना है। अब ऐसे आदमी को जीना कैसे सिखाएं ?
जीओ, पर होश से जीओ, ज़िंदगी अनमोल देन है। ज़िंदगी परमेश्वर की बहुत बड़ी कृपा है। इसलिए इसका अनादर मत कीजिए। शरीर व मन को स्वस्थ रखिए, मन को खाली रखिए और खाली हुए में ही राम-नाम की गूँज उठेगी। जिस मन में चिंताएँ भरी रहेंगी वहाँ राम-नाम की गूँज कैसे उठ सकती है? रामनाम की गूँज उठाने के लिए मन के इस कमरे को खाली करना होगा, तभी राम-नाम गूंजेगा। तुम एक बार राम-नाम बोलोगे, दस बार तुम्हारे अंदर यह राम मंत्र गूँजता रहेगा ।








