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अजपाजप ” सोहम् “

स्वरयोग में भगवान् शिव ने पार्वती से कहा कि ‘ सोहम् ‘ श्वास प्राकृतिक ध्वनि है । यह कोई मन्त्र नहीं है जिसे मनुष्य ने रच दिया है । यह हमारे दिमाग की इन्टोनेशन है ।

दिन में भी ऐसा बहुत सा वक़्त आप के पास होता है , जिस वक़्त में…….. मान लो आपका काम चलने का है या कुछ करने का है , तो उस समय आप एक काम कर सकते हो , वह है ‘ अजपाजप ‘ ।

अजपाजप में हमारे श्वास की जो स्वाभाविक टोन है , उस टोन को पकड़ना है । वह टोन है ‘ सोहम् ‘ । स्वरयोग में भगवान् शिव ने पार्वती से कहा कि ‘ सोहम् ‘ श्वास प्राकृतिक ध्वनि है । यह कोई मन्त्र नहीं है जिसे मनुष्य ने रच दिया है । यह हमारे दिमाग की इन्टोनेशन है । उस इन्टोनेशन को आधार बना लें ।

श्वास भीतर जाने पर ‘ सो ‘ श्वास बहार आने पर ‘ हम् ‘ । फ़िर इसका काउंटर श्वास भीतर जाए तो ‘ हम् ‘ , श्वास भर जाए तो ‘ सो ‘ ; तो ‘ सोहम् ‘ एक । दूसरा ‘ हम् सो ‘ ।

जब ‘ सोहम् ‘ बोले तो ध्यान आज्ञाचक्र में हो । जहाँ हमारी रीढ़ की हड्डी खत्म होती है , जिसे पीनियल ग्लैंड बोलते हैं , यह आज्ञाचक्र का क्षेत्र है । यह बाहर का क्षेत्र है । तो आज्ञाचक्र के इस क्षेत्र पर ध्यान रखते हुए ‘ सो ‘ और जब ‘ हम् ‘ बोलें तो अपने विशुद्धि चक्र पर ध्यान रखना है । ‘ हम् ‘ हमारे विशुद्धि चक्र का मंत्र है ।

‘ सो ‘ आज्ञाचक्र में और ‘ हम् ‘ कंठ में और जब उलटा चले तो ‘ हम् ‘ कंठ से , ‘ सो ‘ आज्ञाचक्र में ।

दूसरी स्थिति यह है कि जब हमारा मन श्वास में इतना समाहित हो जाएगा कि ‘ सोहम् ‘ की जो टंकार है, वह सूक्ष्म होती जाती है । अब ऐसी स्थिति में श्वास भीतर चल रहा है और ‘ सोहम् ‘ की सूक्ष्म गूंज चल रही है । बोल भी रहे हैं , काम भी कर रहे हैं ,शरीर से सारे काम भी हो रहे हैं लेकिन भीतर ‘ सोहम् ‘ चल रहा है । यह अजपाजप की दूसरी स्थिति है ।

तीसरी स्थिति है – नींद में शरीर चला गया , पर ‘ सोहम् ‘ की गूंज फ़िर भी हो रही है और अगर कोई सपना आ जाए तो सपने में भी यही देखेगा कि मैं ध्यान के आसन में बैठा हूँ ,श्वास गहरा ले रहा हूँ , गहरी नींद से जब जगता है तो बाकि सब चीजों का ध्यान बाद में आएगा, पहले ‘ सोहम् ‘ की गूंज ही सुनाई पड़ रही होगी । यह है अजपाजप की तीसरी स्थिति।

अब तुम ऊपर की दो स्थितियां तो ला सकते हो , परन्तु तीसरी स्थिति में आना मुश्किल है । जिसका मन बिखरा है , जिसकी इन्द्रियां असंयमित है , जिसके मन में संतोष और तप नहीं है , ऐसे व्यक्ति को अजपाजप की पहली स्थिति करनी भी मुश्किल है । अजपाजप में अगर प्रवेश करना है तो यम , नियम , आसन , प्राणायाम का सही से पालन करो, तो प्रत्याहार अपने आपसे घटित होगा। इसके बाद अजपाजप का संकल्प करोगे तो तुंरत जप होने लग जाएगा। पहली स्टेज तुम लाओगे, दूसरी और तीसरी स्टेज अपने आप जायेगी।