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मन कितना बिखरा है?

आज मैं आपको एक प्रयोग देना चाहती हूँ जिससे आप समझ पायें कि आपका मन कितना बिखरा है। क्योंकि कभी - कभी रोगी को भी पता नहीं होता है कि उसे रोग है। तो अब यह ज्ञान तो करना पड़ेगा कि रोग भी है। जिस किसी के पास घर में घड़ी हो, वाल क्लॉक हो या रिस्टवाच जिसमें सैकिंड की सुई हो उस घड़ी को अपने सामने रखिएगा और एक मिनट के लिए लगातार सैकिंड की सुई को देखियेगा और गिनते रहिएगा कि एक मिनट में तुम्हारे मन में कितने विचार आए। पाँच या दस मिनट के लिये कोई कैसेट नहीं, ध्यान कीर्तन की कोई टेप नहीं, कुछ नहीं लगाना बिल्कुल खाली होकर बैठना। कोई मंत्रजाप नहीं करना, कोई श्वासों पर ध्यान नहीं लगाना, कोई प्राणायाम नहीं करना, कोई कुम्भक नहीं करना।
सिर्फ़ खाली होकर दस मिनट बैठिएगा। इस दस मिनट में आपको बड़े अच्छे से नजारा हो जाएगा कि मन के अन्दर कितनी गंदगी है।